हिन्दी विभाग: स्थापना, इतिहास व स्वरूप:
का. सु. साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना के साथ ही हिन्दी विभाग की भी स्थापना जुलाई 1951 में हुई। आरम्भ में हिन्दी भाषा व साहित्य का अध्ययन-अध्यापन स्नातक स्तर पर था लेकिन जुलाई 1970 से विभाग में परास्नातक पाठ्यक्रमों के शिक्षण की मान्यता भी महाविद्यालय को प्राप्त हो गयी। स्वतंत्रता के पश्चात् वैचारिक और भावनात्मक तौर पर भी हिन्दी साहित्य के अध्ययन की तीव्र आवश्यकता अवध क्षेत्र में बनी हुई थी क्योंकि स्वाधीनता आन्दोलन को लेकर जो उद्वेलन अवध-क्षेत्र में था उसकी एक प्रमुख उत्प्रेरणा के रूप में हिन्दी भाषा व साहित्य के भीतर अन्तर्निहित आन्दोलनधर्मी चरित्र की भूमिका इस पूरे कालखण्ड की सर्वाधिक उल्लेखनीय विशेषता के तौर पर जनमानस में स्वीकृत रही थी। विभाग के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ बद्री नारायण श्रीवास्तव थे लेकिन यह डॉ राजनारायण मिश्र थे जिन्होंने विभाग के गठन और आरम्भिक पाठ्यक्रम की संरचना की निर्मिति के साथ-साथ सामूहिक नेतृत्व के बल पर महाविद्यालय में हिन्दी विभाग को शीर्षस्थानिक महत्त्व दिलाने में केन्द्रीय भूमिका का निर्वहन किया। यह अलग से रेखांकित करने की आवश्यकता है कि हिन्दी विभाग की स्थापना के बाद अन्तरिम तौर पर कुछ महीनों तक विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम उस समय के लोकप्रिय कवि पं रामरक्षा त्रिपाठी 'निर्भीक' ने किया था। हिन्दी विभाग को डॉ इंद्रपाल सिंह 'इंद्र', डॉ राधिका प्रसाद त्रिपाठी, डॉ चन्द्रिका प्रसाद शर्मा, डॉ रामशंकर त्रिपाठी, डॉ हौसिला प्रसाद सिंह, डॉ बृजभूषण लाल (बी.बी. लाल), डॉ कमला प्रसाद मिश्र, श्री राम अकबाल त्रिपाठी 'अनजान', डॉ कमलाकर पाण्डेय, डॉ श्रीकृष्ण उपाध्याय, डॉ रामदुलारी देवी, डॉ जनार्दन उपाध्याय, डॉ रामदरश राय, डॉ रंगनाथ पाठक, डॉ सुरेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ शोभा सत्यदेव व डॉ सरोज ने अपनी सेवाओं से समृद्धतर करने का कार्य किया। इन मनीषियों में डॉ राजनारायण मिश्र, डॉ राधिकाप्रसाद त्रिपाठी, डॉ चन्द्रिका प्रसाद शर्मा, डॉ रामशंकर त्रिपाठी, डॉ हौसिला प्रसाद सिंह, डॉ कमला प्रसाद मिश्र, अनजान जी, डॉ कमलाकर पाण्डेय, डॉ जनार्दन उपाध्याय व डॉ शोभा सत्यदेव ने अपने वैदुष्य और भावयित्री/कारयित्री प्रतिभा से विभाग को अकादमिक प्रतिष्ठा और यश प्रदान करने का अतुलनीय कार्य किया है।
कला वर्ग में स्नातक और परास्नातक स्तर पर मुख्य विषय के तौर पर हिन्दी के अध्ययन-अध्यापन के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अन्तर्गत बहुविषयक संस्थान की परिकल्पना को मूर्त रूप देते हुए विज्ञान व वाणिज्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी द्वितीयक विषय के रूप में भी हिन्दी विषय के अध्ययन की सुविधा इस केन्द्र की एक उल्लेखनीय विशेषता है। स्नातक स्तर पर हिन्दी साहित्य के अन्तर्गत अनुवाद, सृजनात्मक लेखन, भाषा विज्ञान और पत्रकारिता व संचार माध्यम आदि विषयक्षेत्रों को लेकर अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को यहाँ के गहन प्रशिक्षण से भविष्य में अपने ज्ञान और अपनी दिशा को विशेषीकृत करने में बेहद सहायता मिलती है। प्रतियोगी परीक्षाओं के अतिरिक्त नेट/जेआरएफ और शोध के अनन्तर यहाँ से अध्ययन-प्राप्त विद्यार्थियों ने सार्वजनिक जीवन में सफलता के अद्भुत कीर्तिमान रचे हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों, विशेषकर अनेक विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में हिन्दी विभागों में योग्य प्राध्यापकों का मानव-संसाधन सृजित करने में महाविद्यालय के हिन्दी विभाग की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान में हिन्दी विभाग में डॉ अनुराग मिश्र, डॉ परेश कुमार पाण्डेय, डॉ अनिल कुमार सिंह, डॉ पवन कुमार सिंह, डॉ संतोष कुमार सरोज, डॉ छाया सिंह, डॉ अपर्णा मिश्र, डॉ आलोक कुमार सिंह, डॉ कृष्ण कुमार पाल व डॉ दिनेश कुमार प्राध्यापक के तौर पर कार्यरत हैं, जिससे संख्या और अकादमिक गुणवत्ता में भी यह महाविद्यालय के सबसे बड़े विभागों में से एक बन गया है।